न सर्वे ना डी नोटिफाइड, लाभ से वंचित कच्ची बस्तियां

बीकानेर. प्रशासन शहरों के संग अभियान को शुरू होने के करीब एक माह बाद भी कच्ची बस्तियों में रहने वाले लोगों को अभियान का लाभ नहीं मिल रहा है। नगर निगम और नगर विकास न्यास न पूर्व में घोषित कच्ची बस्तियों को डी नोटिफाइड करने की कार्यवाही कर रहा है और न ही जो क्षेत्र कच्ची बस्तियों की श्रेणी में शामिल किए जाने है, उनको शामिल कर रहा है। अभियान के बावजूद कच्ची बस्तियों में रहने वाले लोग सरकार और निकायों की तरफ ताक रहे हैं। अभियान को लेकर लगभग रोज सामने आ रहे निर्देशों में उलझे अधिकारी-कर्मचारी कच्ची बस्तियों में रहने वाले लोगों को पट्टे जारी करने की तरफ ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। जानकारों का कहना है जो कच्ची बस्तियां पूर्ण रूप से विकसित हो चुकी है व सभी सुविधाओं से युक्त हो गई है उनके डी नोटिफाइड होने से ही अभियान का पूरा लाभ इन बस्तियों में रहने वाले लोगों को मिल सकेगा।

 

43 बस्तियां डी नोटिफाइड की कतार में

नगर निगम और नगर विकास न्यास क्षेत्र में 43 कच्ची बस्तियां है। इनमें से 80 प्रतिशत से अधिक कच्ची बस्तियां पूर्ण रूप से विकसित हो चुकी है। निगम और न्यास इन बस्तियों की कागजी प्रक्रिया पूरी कर स्थानीय स्तर पर ही इनको डी नोटिफाइड करने की कार्यवाही कर सकता है। लेकिन दोनो ही विभाग कच्ची बस्तियों को गैर कच्ची बस्तियां घोषित करने में उदासीनता बरत रहे है। बताया जा रहा है कि निगम क्षेत्राधिकार में 30 और न्यास क्षेत्राधिकार में 13 कच्ची बस्तियां है।

 

डी नोटिफाइड का यह मिलेगा लाभ

नगर निगम और नगर विकास न्यास क्षेत्र में स्थित और अधिसूचित कच्ची बस्तियों के डी नोटिफाइड घोषित होने का लाभ वहां रहने वाले लोगों को मिलेगा। बताया जा रहा है कि किसी कच्ची बस्ती के डी नोटिफाइड होने से वहां लोगों को लीज डीड और स्टेट ग्रांट के पट्टे जारी हो सकेंगे। स्थानीय निवासी अपनी जमीनों को बेच सकेंगे व मोरगेट एनओसी का लाभ ले सकेंगे। एक मुश्त दस साल की लीज राशि जमा करवाने पर फ्री होल्ड का पट्टा जारी हो सकेगा।

 

यह हो रहा नुकसान

अधिसूचित कच्ची बस्तियां जो पूर्ण रूप से विकसित हो चुकी है, लेकिन डी नोटिफाइड नहीं हो रही है, इसका नुकसान स्थानीय लोगों और संबंधित निकाय दोनों को हो रहा है। बताया जा रहा है कि डी नोटिफाइड नहीं होने से लोग अपनी जमीनों को बेच नहीं पा रहे है। आर्थिक नुकसान हो रहा है। बैंक ऋण नहीं दे रही है। आंवटन पत्र का नामांतरण नहीं हो रहा है। वहीं ११० वर्ग गज तक का ही पट्टा मिल रहा है। इससे अधिक जमीन है तो उसका पट्टा नहीं मिल सकता है।

 

जल्द घोषित हो गैर कच्ची बस्तियां

अभियान के दौरान अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित करवाने के लिए आवश्यक है कि निगम और न्यास अपने-अपने अधिकार क्षेत्र की कच्ची बस्तियों को डी नोटिफाइड किया जाए। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी कच्ची बस्ती प्रकोष्ठ व कामगार कांग्रेस के प्रदेश महासचिव डॉ. मिर्जा हैदर बेग के अनुसार निगम और न्यास एम्पावर्ड कमेटी की बैठक आयोजित कर कच्ची बस्तियों को डी नोटिफाइड करें। इसका लाभ लोगों को मिलेगा वहीं निकायों को भी राजस्व की प्राप्ति होगी।



source https://www.patrika.com/bikaner-news/prashasan-shahron-ke-sang-abhiyan-7151498/

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