बायोलॉजिकल पार्क : तीन साल में बन पाए तीन पिंजरे

-जितेन्द्र गोस्वामी

बीकानेर. नगर का एक मात्र बड़ा मनोरंजन स्थल के रूप में निर्माणाधीन मरुधरा बॉयोलॉजिकल पार्क नौ दिन चले अढाई कोस की कहावत चरितार्थ कर रहा है। अटक-अटक कर चल रहे कार्य से लगता नहीं कि यह अगले दो-तीन साल तक पूरा हो पाएगा। इस संबंध में तीन साल पूर्व निर्माण कार्य शुरू किए गए थे। छत्तीस करोड़ की योजना में अभी कुछ ही काम हो पाए हैं। हालात यह है कि इसके लिए बजट भी बहुत धीमी गति से मिल रहा है। इसके नतीजे में अभी पार्क के अंदर अभी तक बाउंड्री वाल के साथ सिर्फ तीन पिंजरे ही बन पाए हैं। इस माह चौथे पिंजरे का निर्माण शुरू हुआ है।
कोराना काल में लॉकडाउन के दौरान काम बंद हो गया था। नवंबर में फिर से बजट की मंजूरी मिल गई थी। कुछ राशि मिलने पर फिर से थोड़ा कार्य शुरू हुआ था। बाद में वह भी बंद हो गया। इस दौरान वहां पर पांच खुले पिंजरे बनाए जाने थे। तीन साल से रेंगते रेंगेते कार्य में पहले बाउंड्री वाल बनाई गई। फिर पिंजरों का निर्माण शुरू हुआ। यहां जैसे-जैसे राशि मिलती गई तो काम उसी हिसाब से होता गया। लगभग पांच साल पूर्व बीछवाल में इस पार्क के निर्माण की योजना बनाकर खाका तैयार किया गया था। वर्ष २०१७ में निर्माण कार्य शुरू किया गया था। शुरुआत में काम में थोड़ी तेजी रही बाद में राज्य में सरकार बदलने के साथ ही काम भी धीमा होता चला गया।


पांच वर्ष से चल रही योजना
बीकानेर में करीब डेढ दशक पूर्व पब्लिक पार्क स्थित जंतुआलय बंद कर दिया गया था। उस वक्त इन पशुओं के भोजन संबंधी बजट नहीं होना कारण बताया गया था। इसके बाद सरकार ने वर्ष २०१५ में बीछवाल में मरुधरा बायोलॉजिकल पार्क बनाने की घोषणा की थी। उस समय इस पार्क को बनाने के लिए पचास हैक्टेयर क्षेत्र में विकसित करने की योजना थी। इसके लिए बीछवाल में जमीन चिन्हित की गई थी। उस समय २५ करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली थी। इसके निर्माण की जि मेदारी आरएसआरडीसी को सौंपी गई और जबकि मोनिटरिंग का जि मा वन विभाग को दिया गया। इसके बाद बजट में राशि बढ़ाकर ३६ करोड़ रुपए कर दी गई। यह राशि धीरे-धीरे किस्तों में मिल रही है। वर्तमान में स्वीकृत तीन करोड़ मिलने हैं जो अभी तक नहीं मिल पाए हैं।


मंथर चाल से चल रहा था निर्माण
चार वर्ष पूर्व इसका काम शुरू हुआ था। पार्क के लिए सबसे पहले चिन्हित भूमि के चारों तरफ दीवार एवं फैसिंग निर्माण का कार्य किया गया। इस संबंध में आरएसआरडीसी के एईएन निखिल मिश्र ने बताया कि यह कुल ३६ करोड़ का प्रोजेक्ट है। जैसे-जैसे बजट राशि मिलती है। वैसे वैसे कार्य किया जा रहा है। अभी तीन करोड़ रुपए स्वीकृत हैं लेकिन यह राशि मिली नहीं है। उन्होंने बताया कि दो दर्जन के आसपास यहां एनक्लोजर बनने हैं। अभी मिली राशि में पांच एनक्लोजर में से चार के बनने का काम चल रहा था। इनमें से तीन तैयार हो गए हैं। उनमें फिनिशिंग का काम चल रहा है। चौथे एनक्लोजर का काम शुरू किया गया है। अब एक एनक्लोजर और बनाने के साथ जानवरों के लिए पेयजल संबंधी व्यवस्था के लिए टैंक बनना है। पाइप लाइन आदि बिछाने के साथ पार्क में अन्य सुविधाओं के कार्य भी होने शेष हैं।


संभाग में सबसे बड़ा मनोरंजन स्थल
बीकानेर प्रदेश के छह बड़े नगरों में से एक है तथा यह संभाग मु यालय भी है लेकिन यह नगर विकास की दृष्टि से पिछड़ा हुआ है। शहर में मनोरंजन स्थल के रूप में ऐसा कोई स्थान नहीं है जहां पर परिवार के साथ जाया जा सके। रजवाड़े के समय से पब्लिक पार्क में एक छोटा सा जंतुआलय था जो कि डेढ दशक वर्ष पूर्व बंद कर दिया गया। वन विभाग ने मांसाहारी प्राणियों के लिए भोजन का बजट नहीं होने का हवाला दिया था। इस दौरान वहां से शेर, बाघ, भालू, सियार, मगरमच्छ को हटाकर जयपुर, उदयपुर आदि के चिडिय़ाघरों में शि ट कर दिए गए थे।


जानवरों को खुली व बड़ी जगह
इस पार्क के बनने से पशुओं को खुली एवं बड़ी जगह मिल सकेगी। इस पार्क को विकसित करने का उद्देश्य एक यह भी था कि जहां लोगों को घूमने फिरने का स्थल मिलेगा वहीं शोधार्थियों के लिए शोध का स्थान भी उपलब्ध हो सकेगा। लुप्त हो रहे मरुस्थलीय जीवों के संरक्षण के बारे में भी काम हो सकेगा। यह पार्क जहां शेर, बाघ, भालू जैसे जानवरों की पनाहगाह होगी तो हिरणो के संरक्षण के लिए सुरक्षित स्थान बन सकेगा। साथ ही लुप्त हो रही जंगली बिल्ली, गादड़ जैसे जीव जंतु रखे जा सकेंगे। पार्क में अन्य मनोरंजन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी



source https://www.patrika.com/bikaner-news/biological-park-three-cages-could-be-constructed-in-three-years-6661642/

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